Sunday, January 3, 2016

हार न मानने वाले तेवर

तेवर तो अब भी वैसे ही तल्ख हैं हमारे
कुछ आराम के मूड में हैं, नहीं हैं हारे
दुश्मन को भी सांस लेने का मौका देते हैं
इसलिए कुछ देर युद्ध विराम कर लेते हैं।

अंगारे आज भी वैसे ही दहक रहे हैं,
हाथ लगाकर देख लो, गर्म राख गवाह है
गर्मी जवानी की नहीं, ये हमारी फितरत है
अभी कुछ आराम, फिर समझो दुश्मन की आफत है।
(C) दिगपाल सिंह

Tuesday, January 6, 2015

दिल्ली पुलिस Cyber Cell Not Exist

हमारे-आपके किसी के साथ भी साइबर धोखाधड़ी होती है तो उससे निपटने के लिए पुलिस विभाग में एक साइबर सेल बनाया जाता है. जाहिर है दिल्ली पुलिस खुद को देश की सबसे अच्छी पुलिस कहती है तो यहां भी साइबर सेल होना ही चाहिए और है भी. इनका काम ईमेल पर धोखाधड़ी, फोन पर धोखाधड़ी, अश्लील मैसेज या तस्वीरें मिलने, अश्लील कॉल मिलने, ब्लैंक कॉल आने आदि-आदि मामलों को सुलझाना है. लेकिन आप साइबर सेल का फोन नंबर मिलाएं तो दूसरी तरफ से जवाब आता है 'This telephone No. does not exist.' अब आपके पास क्या रास्ता है, है भी या नहीं...

दरअसल मंगलवार को मुझे +4717399676 और +1875945 इन दो नंबरों से करीब 15 मिनट तक लगातार एक के बाद एक कॉल आए. दोनों नंबर अनजाने थे और किसी दूसरे देश थे इसलिए मैं बार-बार काटता रहा. लेकिन इन दो नंबरों से बारी-बारी लगातार कॉल आते रहे, जो 15 मिनट बाद थमे. इस बीच गलती से मैंने एक बार फोन उठा भी लिया, लेकिन 6 सेकेंड के बाद काट दिया. घर आकर जब मैंने इंटरनेट पर इन नंबरों के बारे में जांच की तो +4717399676 यह नंबर नॉर्वे का और +1875945 नंबर अमेरिका का निकला. क्योंकि मेरा कोई जानकार इन दोनों देशों में नहीं रहता तो मुझे लगा यह साइबर अपराधी हो सकते हैं.

मैंने तुरंत दिल्ली पुलिस के हेल्पलाइन 100 नंबर पर कॉल करके साइबर सेल के फोन नंबर की मांग की. हेल्पलाइन से मुझे साइबर सेल का जो नंबर दिया गया वह 011-27348398 था. जब मैंने इस नंबर पर कॉल किया तो सामने से कंप्यूटराईज आवाज आयी 'This Telephone No. does not exist' मतलब यह टेलीफोन नंबर उपलब्ध ही नहीं है.
100 नंबर पर किए गए कॉल की रिकॉर्डिंग

अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि दिल्ली में साइबर सेल ही नहीं है या पुलिस हेल्पलाइन के पास उसका नंबर नहीं है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की वेबसाइट www.delhipolice.nic.in पर भी इससे संबंध‍ित कोई जानकारी मुझे नहीं मिली.
साइबर सेल के फोन नंबर का हाल

गनीमत ये है कि मेरे पास हेल्पलाइन पर की गई कॉल और साइबर सेल के फोन नंबर पर की गई दोनों कॉल की रिकॉर्डिंग है. अत: यह आपके लिए पेश कर रहा हूं. अगर आपके पास साइबर सेल का फोन नंबर हो तो कृपया कमेंट बॉक्स में शेयर करें. अगर दिल्ली पुलिस कमिश्नर का नंबर हो तो उनसे कहें कि कृपया साइबर सेल को एक फोन नंबर तो लगाकर दे ही दें.

लेखक दिगपाल सिंह aajtak.in वेबसाइट में सीनियर सब एडिटर हैं.

Monday, December 2, 2013

'आप' से सरकार है

'आप' से सरकार है,
सरकार से 'आप' नहीं.
यही पूरी सच्‍चाई है,
जिसे आज तक किसी ने बताया नहीं.
दिल्‍ली से भ्रष्‍टाचार की दलदल,
घोटालों की बौछार और
मिटाने के लिए गंदगी का श्राप,
चलिए मिलकर 'झाड़ू' उठाएं,
कल ही हम और 'आप'

Tuesday, November 26, 2013

चलिए झाड़ू लगाएं...

एक 'हाथ' ने पूरे देश में भ्रष्‍टाचार की इतनी गंदगी फैलायी कि
उसमें यूपी, उत्तराखंड से लेकर झारखंड, गुजरात, एमपी
छत्तीसगढ़ और कर्नाटक तक 'कमल' की खेती लहलहा उठी.
भ्रष्‍टाचार के इसी दलदल में कूदकर 'हा‍थी' ने आत्‍महत्‍या की तो,
दलदल की कीचड़ से 'साइकिल' से लेकर 'कटार' तक सभी सन गए.
अब किसे दोष दें ये वक्‍त, ये 'घड़ी' ही भ्रष्‍टाचार की है,
'लालटेन' भी चारे कि बिना नहीं जलता,
'धनुष-बाण' और 'तीर' भी अब भ्रष्‍टाचारियों के लिए ब्रम्‍हास्‍त्र बन गए है.
अब तो 'सूरज' भी भ्रष्‍टाचारियों के आंगन में ही उगता है,
न 'दो पत्तियां' न ही 'तीन पंखुड़ि‍यां' किसी को भी ईमानदारी की रोशनी रास नहीं आयी.
'कलम-दवात' भी भ्रष्‍टाचारियों के इतिहास को लिखते-लिखते नहीं थकते
'तराजू' भी बेइमानी के बोझ से दबा जा रहा है.
ऐसे में इस 'दल-दल' को साफ करने के लिए कोई तो चाहिए,
चलिए 'झाड़ू' लगाएं...

Wednesday, July 31, 2013

दो दिलों को मिला दो प्‍लीज, मार कर कैसी लव स्‍टोरी?

मेरे डायरेक्‍टर और फिल्‍मों की कहानी लिखने वाले राइटर भाईयो आजकल आपको हो क्‍या गया है? आप बनाते तो लव स्‍टोरी हो, लेकिन अंत तक आते-आते हीरो-हिरोइन को मिलाने की बजाए दोनों में से एक को मार देते हो. आखिर हो क्‍या गया है आपको. क्‍यों आप दो प्‍यार करने वाले दिलों को मिलने नहीं दे रहे. हमारे हिन्‍दी फिल्‍मों के इतिहास में हीरो-हिराइन के दुश्‍मन वैसे ही कौन से कम थे, जो आप लोग उनकी जान के पीछे पड़ गए हो.

कभी प्रेम चोपड़ा ने अपनी चतुर चालों से प्रेमियों के राहों में कांटे विछाए तो कभी मोगेंबो खुश हुआ तो आशिकों की जान सूख गई. शाकाल ने भी कम जुल्‍म नहीं ढाऐ दो प्‍यार करने वाले दिलों पर. प्राण साहब का इंतकाल हुए अभी ज्‍यादा दिन नहीं गुजरे हैं, लेकिन भगवान माफ करे उनके कर्मों के कारण आशिकों के दिलों से खूब बददुआएं निकली होंगी. टाइगर अजित को कोई कैसे भूल सकता है. जीवन ने तो आशिकों की पिटाई करने से भी गुरेज नहीं किया. ललिता पवार ने कभी सास बनकर तो कभी कुछ और बेटे का प्‍यार यानी अपनी बहू पर जो जुल्‍म ढाए वो पर्दे से बाहर भी निकल आए.

गब्‍बर सिंह तो सभी विलनों का बाप निकला, उसने तो वीरू की फूल सी नाजुक प्रेमिका बसंती को टूटे कांच पर नाचने के लिए मजबूर कर दिया था. वैसे एक बात बताऊं हमारे हीरो इन विलनों से पार पा कर अपनी हीरोइन को ले उड़े, लेकिन आप तो सच में बड़े वाले हो यार!


कुछ साल पहले 'गजिनी' फिल्‍म देखी थी. फिल्‍म देखकर हॉल से बाहर आया तो एक ही दुख सता रहा था, यार संजय सिंघानिया अपनी प्रेमिका कल्‍पना को अपनी सच्‍चाई नहीं बता पाया और वो मर गई. हाल के दिनों में तीन फिल्‍में देखी हैं और यहां पर भी आप लोगों ने दर्द को दिल की गहराई में सूल की तरह उतार दिया. 'रांझणा' देखी यहां पूरी फिल्‍म में हीरोइन से चांटे खाते रहे हीरो को जब अपनी प्रेमिका मिल सकती थी, ठीक उसी समय पर आपने उसे मार दिया. फिल्‍म 'लुटेरा' में प्‍यार एक बार फिर से परवान चढ़ता लेकिन उससे पहले ही लेखक साहब आपने पुरानी फिल्‍मों के जज की तरह अपनी कलम की नोंक तोड़ दी. तीसरी फिल्‍म, जिसने 'गजिनी' के बाद सबसे ज्‍यादा दुख दिया वह थी 'आशिकी-2'. आपकी तो नजर, नीयत और दिमाग सब कुछ खराब है. पहली वाली 'आशिकी' में सारे दुख-दर्द झेलकर भी अंत में हीरो-हिरोइन मिलते हैं तो हर युवा के दिल में प्‍यार का फूल खिलने लगता है. लेकिन आपको दूसरों की खुशी कहां अच्‍छी लगती है? 'आशिकी-2' में सब कुछ अच्‍छा चल रहा था, हिरोइन पल-पल हीरो का साथ दे रही थी, हीरो ने भी सुधरने का वादा कर लिया था, लेकिन आपने उसे समुद्र में कुदा दिया.

देखिए आशिकों की बददुआएं मत लीजिए. आशिकों की बददुआएं बहुत बुरी होती हैं. कबीर दास का दोहा तो सुना ही होगा आपने - दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय। मरी खाल की सांस से, लोह भस्‍म हो जाय।। भईया पूरी राम कहानी का सार यह है कि आशिकों को मिलाकर कुछ अच्‍छा काम कर लो.

आप तो जानते ही हैं आशिकों के कितने दुश्‍मन इस बॉलीवुड में पहले से ही हैं. प्रेम नाथ, रंजीत, आउ लौलिता कहने वाले शक्ति कपूर, कादर खान, डैनी, अनुपम खेर, नसीरउद्दीन शाह, गुल्‍शन ग्रोवर, परेश रावल, सदाशिव अमरापुरकर, आशुतोष राणा, रजा मुराद, किरन कुमार, मोहन अगाशे, आशीष विद्यार्थी, आदित्‍य पंचोली, गोविंद नामदेव, शरत सक्‍सेना, राहुल देव, पंकज कपूर, बोमन इरानी और न जाने कितने विलन हुए इस फिल्‍म इंडस्‍ट्री में जिन्‍होंने आशिकों का जीना मुहाल किए रखा है. अब आप लोग भी प्‍यार के सुंदर गीत गाने वाले इन आशिकों की जान के पीछे पड़ जाएंगे तो फिर प्‍यार के दो फूल कैसे खिलेंगे?

Monday, January 21, 2013

इलाज के इंतजार में बुरी तरह बीमार आरबीटीबी अस्‍पताल


आरबीटीबी जी हां, किंग्‍जवे कैंप दिल्‍ली में बना राजन बाबू टीबी अस्‍पताल टीबी के मरीजों के इलाज के लिए बना है. लेकिन इसकी हालत देखकर लगता है इस अस्‍पताल को ही जिन बीमारियों ने जकड़ा हुआ है उनसे निजात दिलाने के लिए इसकी जबरदस्‍त सर्जरी की जरूरत है.

टीबी के मरीज बहुत संवेदनशील होते हैं और उन्‍हें किसी भी तरह के इन्‍फेक्‍शन की संभावना ज्‍यादा होती है. इन्‍फेक्‍शन के खतरे को टालने के लिए मरीज के आसपास साफ-सफाई बेहद जरूरी होती है. लेकिन इस अस्‍पताल में आने पर आपका यह भ्रम शायद टूट जाए. अस्‍पताल में जहां तहां आवारा कुत्ते घूमते हुए नजर आ जाते हैं. मरीज के बेड के आसपास और बेड के नीचे इन कुत्तों का डेरा है. मरीज और उनकी देखरेख के लिए रुके उनके रिश्‍तेदारों से बात करने पर वे बताते हैं कि कुत्ते ताक में रहते हैं और पलक झपकते ही सामान चुराकर ले जाते हैं. ज्‍यादातर बेड के साथ लगी साइड टेबल के निचले हिस्‍से में दरवाजा नहीं है, इसलिए सामान अंदर नहीं रखा जा सकता और कुत्ते हमेशा ताक में रहते हैं. एक मरीज के रिश्‍तेदार ने बताया कि नर्सिंग स्‍टाफ ने उन्‍हें आगाह किया है कि यहां एक पागल कुत्ता घूम रहा है बच के रहना.

यही नहीं मरीज के रिश्‍तेदारों ने बताया कि मरीजों के लिए बने टॉयलेट में सुबह-शाम छोड़कर दिनभर पानी भी नहीं आता. जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है. गंदे पानी की निकासी के लिए उचित व्‍यवस्‍था तक नहीं है, जिस कारण जगह-जगह गंदा पानी जमा है और उसमें बदबू आती रहती है.

अस्‍पताल के नर्सिंग स्‍टाफ से बात करने पर उनका कहना है कि कुत्तों को कैसे रोक सकते हैं. उनके अनुसार उन्‍होंने एमसीडी में कुत्तों के संबंध में शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. यही नहीं नर्सिंग स्‍टाफ ने तो अस्‍पताल में कुत्तों की इतनी बड़ी संख्‍या के लिए मरीज और उनके रिश्‍तेदारों को जिम्‍मेदार ठहरा दिया. उनका कहना है कि मरीज व रिश्‍तेदार कुत्तों को खाना देते हैं, इसलिए वे मरीजों के आसपास घूमते रहते हैं.

टॉयलेट में पानी न होने के मामले में नर्सिंग स्‍टाफ सफाई देता है, 'मरीज के रिश्‍तेदारों को दिनभर के लिए पानी भरकर रखना चाहिए, सुबह-शाम तो पानी आता ही है.

Thursday, September 22, 2011

32 रुपए की अमीरी: कैसे पूरी होगी थाली?

भारत सरकार के अनुसार अगर आप दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में रहते हैं और चार लोगों के परिवार के खाने पर 32 रुपए खर्च करते हैं तो आप गरीब नहीं है। यही नहीं छोटे शहरों और गांवों में 26 रुपए खर्च करने वाला परिवार गरीब नहीं होता।

हालांकि इस आंकड़े को कई बुद्धिजीवी लोग गरीबों के साथ सरकार द्वारा किया गया मजाक बता रहे हैं, कुछ को तो यह सितंबर माह में सरकार द्वारा गरीबों को अप्रैल फूल बनाया जाना लग रहा है। लेकिन जिस किसी भी व्यक्ति ने यह आंकड़ा बनाया है उसे देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिया जाना तो बनता है बॉस। यही नहीं उस व्यक्ति को एक माह तक 32 रुपए में दो वक्त खाना खाकर एक आदर्श स्थापित करने का मौका भी दिया जाना चाहिए।

एक छोटा सा आंकड़ा दिल्ली सरकार का है, जिसमें सरकार ने पिछले दिनों राजधानी में कई जगह सरकारी फूड स्टॉल खोले। इन फूड स्टॉल पर एक वक्त का खाना (4 रोटी, सब्जी, दाल और चावल) 15 रुपए में मिलता है। मतलब दो वक्त के खाने पर खर्च आता है 30 रुपए, फिर भी केन्द्र सरकार के ताजा आंकड़े के अनुसार 2 रुपए बच जाते हैं। दिल्ली सरकार एक व्यक्ति को 15 रुपए में खाना खिला रही है और ताजा आंकड़ा 4 लोगों के परिवार का है। अब सोचें कि कैसे 32 रुपए में चार लोग खाना खा सकते हैं जबकि सरकार ही इतने में नहीं खिला पा रही है।

इसके अलावा एक और आंकड़ा है, इसके बाद आप ही बताएं कि इनमें से क्या कम किया जाए कि जिंदा बचे रह जाएं।

सरकारी राशन की दुकान पर गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए गेहूं 4.65 प्रति किलो मिलता है और एक महीने में प्रति परिवार 25 किलो गेहूं दिया जाता है। इस हिसाब से एक परिवार हर माह गेहूं पर कम से कम 116.25 रुपए खर्च करता है इसके अलावा गेहूं पिसाई पर वह और 50 रुपए खर्च करता है।

इसी तरह गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को राशन की दुकान से 6.15 प्रति किलो के हिसाब से 10 किलो चावल दिया जाता है। इस तरह एक परिवार प्रतिमाह कम से कम 61.50 रुपए चावल पर खर्च करता है। गेहूं और चावल कुल मिलकार 35 किलो अनाज गरीबों को दिया जाता है और अगर राशन वाले की मेहरबानी हुई तो करीब 30 किलो अनाज गरीब को मिल भी जाता है। कई जगह तो राशन वाले 5 किलो चावल और 10 किलो गेहूं पर ही गरीबों को टिका देते हैं। सरकार के अनुसार बेहतरीन अनाज गरीबों में वितरित होता है लेकिन किसी राशन की दुकान पर जाकर आप भी उस बेहतरीन अनाज की सच्चाई जान सकते हैं। इसके बाद उन्हें बाजार भाव से अनाज खरीदना पड़ता है जो बहुत महंगा होता है।

इसके अलावा पूरे महीने जिंदा रहने के लिए अगर एक व्यक्ति पूरे महीने सिर्फ एक ही दाल (पीली मटर दाल) खाता है तो 25 प्रति किलो के हिसाब से 4 किलो दाल पर वह 200 रुपए खर्च करता है। सिर्फ एक सब्जी आलू ही अगर गरीब महीने भर खाए तो वह 8 रुपए प्रति किलो के हिसाब से कम से कम 8 किलो आलू खाता है और उस पर खर्च आएगा 64 रुपए।

एक गरीब व्यक्ति महीने में कम से कम एक लीटर सरसों का तेल तो खाने पर इस्तेमाल कर ही लेता है इसका खर्च आया 65 रुपए। माना जाए कि गरीब महीने में सिर्फ एक रसोई गैस सिलेंडर से काम चला लेता है तो भी इस पर खर्च आया 400 रुपए। महीने भर में प्याज पर खर्च 100 रुपए। करीब 20 रुपए का लहसुन, अदरक आदि तो खा लेता है गरीब बेचारा। एक गरीब महीने भर में 100 रुपए चाय पत्ती पर, 150 रुपए चीनी और 390 रुपए दूध पर भी खर्च करता है। कम से कम 1 किलो नमक महीने भर में खाए तो भी 10 रुपए और करीब 50 रुपए टमाटर पर भी महीने भर में खर्च होते ही हैं। इस हिसाब से महीने का खर्च बनता है 1726.75 रुपए यानि प्रतिदन 57.56 रुपए। अब आप ही बताएं कि इसमें से कौन सी चीज न खाई जाए या कौन सी चीज कम की जाए कि खर्च 32 रुपए से कम हो, ताकि गरीबी रेखा से नीचे मिलने वाले सरकारी लाभ मिल सकें।


गेहूं 4.65 प्रति किलो (25 किलो): 116.25 (एपीएल पर 6.65 प्रति किलो)
चावल 6.15 प्रति किलो (10 किलो): 61.50 (एपीएल पर 9.15 प्रति किलो)
पीली मटर दाल 25.00 प्रति किलो: 200.00
आलू: 8.00 प्रति किलो/ 8 किलो:  64.00
महीने का सरसों का तेल: 65.00
रसोई गैस: 400.00
माह भर का प्याज: 100.00
माह भर का लहसुन: 20.00
माह भर का चाय: 100.00
माह भर का चीनी: 150.00
माह भर का टमाटर: 50.00
माह भर का दूध (प्रतिदिन आधा किलो): 390.00
माह भर का नमक: 10.00
कुल खाने पर खर्च : 1726.75 रुपए। यानि प्रतिदन 57.56 रुपए। ये तो तब है मिर्च-मसाले व अन्य चीजें इसमें शामिल नहीं हैं।

इनके अलावा खर्चे और भी जिन्हें जोड़ दें तो सरकार का गरीबी रेखा का आंकड़ा शर्मसार हो जाएगा।
माह भर का पानी बिल = 50.00
कमरे का किराया : 1000.00
माह भर का बिजली बिल = 100.00
इनके अलावा साबुन, मसाले, छोटी-मोटी बीमारी और दवा पर खर्च, आने जाने का बस का किराया व अन्य।