Wednesday, March 24, 2021

एक झूठा आता है, सब झूठों को ले आता है...

 एक झूठा आता है,

सब झूठों को ले आता है,

सच्चाई का उजियारा खो जाता है,

झूठ का बोलबाला हो जाता है।


ट्वीट करते हैं सब मिलजुल कर,

वायरल होते हैं उनके झूठे स्वर,

जहर बुझे तीर छोड़ते जो ट्वीट,

सुर्खियों में भी छा जाते वो ट्वीट।


सब झूठ का खेला है,

हर तरफ झूठों का रेला है,

नई खबर, नया कारोबार,

नई खबर पाते हैं अखबार।


जो झूठों का साथ देते हैं,

बदले में भरपूर माया पाते हैं,

तारीफ भली लगती उनको,

झूठ बोलना आता जिनको।


झूठ बोलने का मूड है,

सोशल मीडिया में जगह भरपूर है,

यहां भी अगर झूठ ना बोल पाए,

तो क्या बड़े नेता बन पाए।

हमारी नगरी में आए नेता जी

हमारी नगरी में आए नेता जी।

धड़ा-धड़ एक ही सुर में,

नारे लगाएं नेता जी।


चमचे देखो तालियां बजाएं,

और जोर से नारे लगाएं नेता जी।


एक सच और हजार झूठ बोलते हैं,

अपनी कहानी को सच्ची बताएं नेताजी।


झूठ उनका टपके टप-टप, टप-टप,

झूठ की बरखा बरसाएं नेताजी।


विरोधी बोले सब झूठ है सरकार,

झूठ का विस्तार करें नेताजी।


सभी जोर-जोर से ठहाके लगाएं,

ऐसे-ऐसे झूठ बोल जाएं नेताजी।

कोरोना बेटे, कोविड बेटे कहां गए थे

कोरोना बेटे, कोविड बेटे कहां गए थे,

दुनियाभर में लोगों को मार रहे थे,

अमेरिका ने वैक्सीन बनाई भाग रहे थे

इंडिया ने दवा बनाई सोच रहे थे,

अब कहां जाएंगे, जगह ढूंढ रहे थे,

चीन ने पैदा किया वहीं जा रहे थे,

वुहान वापस जाने की प्लानिंग कर रहे थे,

फिर से नया स्ट्रेन बना रहे थे

Tuesday, March 2, 2021

चिड़िया के घर का वर्णन आज के नजरिए से

सबसे पहले मेरे घर का

अंडे जैसा था आकार 

तब मैं यही समझती थी बस

इतना-सा ही है संसार। 


फिर मेरा घर बना दुकान का शटर

टिन की चादर से तैयार

तब मैं यही समझती थी बस

इतना-सा ही है संसार।


फिर मैं निकल गई बिल्डिंगों पर

ऊंची-ऊंची थीं जो बेकार

तब मैं यही समझती थी बस

इतना-सा ही है संसार।


आखिर जब मैंने आसमान में

उड़ने की कोशिश की हजार

हर तरफ बिल्डिंगें ही नजर आईं

पेड़-पौधों से धरती पायी बेजार


तब मेरी समझ में आया

बहुत ही नर्लज

बड़ा ही बेशर्म

है यह इंसान बड़ा ही बेकार।

(C) Digpal Singh Jeena

Thursday, July 30, 2020

बिखरा नहीं हूं, बस थोड़ा सा टूटा हूं...

बिखरा नहीं हूं,
बस थोड़ा सा टूटा हूं।
किसी ने रौंदा नहीं,
बस थोड़ा पीछे छूटा हूं।

फिर उड़ान भरुंगा,
फिर आसमान छुऊंगा।
पतंग की डोर थोड़े ही हूं
जो कटकर गिर जाऊंगा।

नई हमारी परवाज होगी,
मंजिलों से आवाज होगी।
तुम्हारा ही तो इंतजार था,
जीत वो लाजवाब होगी।

हम बिखरें भी तो,
जश्न-ए-बहारा होता है
बीज बनकर गिरते हैं और...
गुलशन का नजारा होता है।

तुम क्या तोड़ोगे हमें,
हम खुद ही टूट जाते हैं।
प्यार से कोई गले लगा ले बस
हमेशा के लिए उसके हो जाते हैं।

Friday, June 5, 2020

मैं बुलाऊंगा तुम्हें ऐ दोस्त तुम चले आना

मैं बुलाऊंगा तुम्हें ऐ दोस्त
तुम चले आना।
खुशियां जो पीछे छूट गईं थीं,
उन्हें साथ में लाना।
अकेले तुम्हें घर में एंट्री मिलेगी नहीं,
भाभी को भी संग लाना।

मैं बुलाऊंगा तुम्हें ऐ दोस्त
तुम चले आना।
खुशियां जो पीछे छूट गईं थीं,
उन्हें साथ में लाना।
आ ही रहे हो तो एक गठरी भरकर
बचपन की यादें भी लाना।
बचपन की यादों में खो जाएंगे हम,
कुछ पुराने किस्से ले आना।

खुशियां जो पीछे छूट गईं थीं,
उन्हें साथ में लाना।
तुम आओगे तो महफिल सजेगी,
दो बियर भी ले आना।

मैं फिर खूब उत्सव मनाऊंगा

लौट आऊंगा मैं एक दिन,
फिर उत्सव मनाऊंगा।
नवरात्र पर व्रत-पूजा करके,
कंजक भी सजाऊंगा।

रक्षाबंधन के त्योहार में,
बहनों संग खूब प्यार लुटाऊंगा।
आएंगे कान्हा भी हमारे घर,
जन्माष्ठमी का त्योहार मनाऊंगा।

मैं फिर खूब उत्सव मनाऊंगा।

सफाई के लिए जुटाऊंगा सबको,
स्वछता का मंत्र भी सिखाऊंगा।
फिर होगी दोस्तों संग हंसी-ठिठोली
लॉन्ग ड्राइव पर भी ले जाऊंगा।

गजनान को भी घर बुलाएंगे,
गणपति बप्पा मोरया चिल्लाऊंगा।
लौट आएगी वो खोई रंगत एक दिन
मैं फिर खूब उत्सव मनाऊंगा।

बड़ा दुखी था मैं इस साल,
अगले बरस बिटिया का जन्मदिन धूम-धाम से मनाऊंगा।
कोरोना के रावण का दहन करके
हर्षोल्लास से दीपोत्सव मनाऊंगा।

बच्चों में खुशियां बांटने को,
सेंटा बनकर आऊंगा।
नए साल का स्वागत भी होगा
दोस्तों संग कुछ जाम भी छलकाऊंगा।

मैं फिर खूब उत्सव मनाऊंगा।

पंचमी पर मां शारदा की पूजा कर,
तिल-कुट का भोग लगाऊंगा।
और फिर फाग में रंग-गुलाल उड़ाकर,
दोस्तों संग होली खूब मनाऊंगा।
मैं फिर खूब उत्सव मनाऊंगा।

जी, बॉस दफ्तर भी आऊंगा
आपके साथ चाय पर चर्चा कर
बोर्ड रूम की लंबी मीटिंग में,
आगे का प्लान भी बनाऊंगा।