Tuesday, December 17, 2019

मुक्त हवा हूं मैं, मुझे बांधने की कोशिश न कर

मुक्त हवा हूं मैं,
मुझे बांधने की कोशिश न कर।
उड़ जाऊंगा झौंके की तरह
बाहों में जकड़ लेने की जिद न कर।

तेरी कोशिशें बेकार जाएंगी
हार तेरी पक्की है।
समय के फेर में कब पड़ा हूं मैं
मुक्त हवा हूं मैं।

जिद तेरी ये बेकार है,
यूं ही रास्ता तय किया है मैंने
मुट्ठी से रेत की तरह
पहले भी कई बार निकल चुका हूं मैं।

मुक्त हवा हूं मैं,
बंधनों को कब मैंने स्वीकारा है।
पिंजरों के व्यापारी हो तुम
आरा कारीगरों से दोस्ती मेरी आला है।

स्वभाव में ही नहीं ठहर जाना,
फिर क्यों कदम रुक जाएं मेरे।
तुम्हें भी ऐसी सलाह नहीं दूंगा,
कोशिशें अपनी जारी रखो

दीवारें तुम उठाते रहो,
खिड़कियां में बनाते चलूंगा
मुक्त हवा हूं मैं
उस पार जाकर ही दम लूंगा।

(c) Digpal Singh Jeena